काउंसलिंग में देरी पड़ी भारी, छात्रा को मिलेगा ब्याज सहित रिफंड और मुआवजा
सिरोही, 29 जून। जीएनएम काउंसलिंग में देरी और फीस वापस नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सिरोही ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने विभाग की कार्रवाई को सेवा में कमी मानते हुए छात्रा के पक्ष में निर्णय दिया है।
मामला सिरोही निवासी छात्रा करिना डाबी से जुड़ा है। वर्ष 2020 में करिना ने जीएनएम काउंसलिंग के लिए आवेदन करते हुए निर्धारित शुल्क जमा कराया था। विभाग की ओर से दिसंबर 2020 में काउंसलिंग आयोजित की जानी थी, लेकिन इसे अचानक स्थगित कर दिया गया। करीब तीन माह की देरी के बाद काउंसलिंग आयोजित हुई।
काउंसलिंग में लगातार हो रही देरी से छात्रा को अपना शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने की आशंका सताने लगी। ऐसे में उसने काउंसलिंग प्रक्रिया से अलग होने और जमा फीस लौटाने का अनुरोध किया, लेकिन विभाग ने उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया। बाद में विभाग ने छात्रा को कॉलेज आवंटित कर उसकी जमा राशि जब्त कर ली।
इस मामले को लेकर छात्रा ने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष अभिमन्यु सिंह राठौड़ तथा सदस्य नवीन चंद्र मिश्रा और जया मिस्त्री की पीठ ने सुनवाई के बाद विभाग की कार्रवाई को अनुचित माना।
आयोग ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय जयपुर को आदेश दिया है कि छात्रा को जमा राशि 10 हजार रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाई जाए। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा तथा 5 हजार रुपये परिवाद व्यय के रूप में भी भुगतान किया जाए। यह समस्त राशि 30 दिनों के भीतर अदा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, आयोग ने जिला कलेक्टर सिरोही के विरुद्ध दायर परिवाद को खारिज कर दिया।
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