सिरोही के भाखर क्षेत्र में होली पर निभाई गई अनूठी परंपरा, सैकड़ों लोग दहकते अंगारों पर नंगे पैर चले

सिरोही के भाखर क्षेत्र में होली पर निभाई गई अनूठी परंपरा, सैकड़ों लोग दहकते अंगारों पर नंगे पैर चले

सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले के आदिवासी बहुल भाखर क्षेत्र में होली के अवसर पर सदियों पुरानी अनोखी परंपरा निभाई गई, जहां सैकड़ों लोग नंगे पैर जलते अंगारों पर चले। इस अद्भुत और साहसिक परंपरा को देखने के लिए आस-पास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

होलिका दहन के बाद निभाई जाती है यह अनूठी परंपरा

होली की रात जब चारों ओर रंगों और उल्लास का माहौल था, उसी समय आबूरोड के भाखर क्षेत्र में आदिवासी समाज के युवाओं ने अंगारों पर चलने की प्रथा का निर्वहन किया। परंपरा के अनुसार, होलिका दहन के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलने से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है और बुरी आत्माएं दूर हो जाती हैं।

आस्था और साहस का प्रतीक है यह परंपरा

भाखर क्षेत्र के बीजेपी नेता देवाराम गरासिया ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे निभाने से गांव पर किसी भी प्रकार की आपदा नहीं आती तथा स्वास्थ्य अच्छा रहता है। माना जाता है कि जब भक्त प्रहलाद को लेकर होलिका अग्नि में बैठी थी, तब तमाम बुराइयाँ जल गई थीं और प्रहलाद सुरक्षित रहे थे। इसी भावना के साथ लोग अपने भीतर की नकारात्मकता को त्यागने और आत्मशुद्धि के लिए इस परंपरा को निभाते हैं।

गांवों में हर साल निभाई जाती है यह परंपरा

यह परंपरा सिरोही जिले के जाम्बूड़ी, उपलागढ़, पाबा और उपला खेजड़ा जैसे गांवों में हर साल होली के अवसर पर निभाई जाती है। शुक्रवार को भी पहले होलिका माता की विधिवत पूजा-अर्चना की गई, फिर ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच युवाओं ने अंगारों पर चलकर अपनी आस्था व्यक्त की।

दूर-दूर से जुटते हैं दर्शक

यह अनूठी परंपरा देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग आसपास के इलाकों से भाखर क्षेत्र में आते हैं। धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलने का यह दृश्य रोमांच और आस्था से भरपूर होता है।

संस्कृति और आस्था की मिसाल है यह परंपरा

आदिवासी समाज की यह परंपरा न केवल आस्था और साहस का प्रतीक है बल्कि यह उनकी संस्कृति और परंपराओं की गहरी जड़ों को भी दर्शाती है। सदियों से चली आ रही इस प्रथा को आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है, जिससे यह साबित होता है कि हमारी लोक परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत और महत्वपूर्ण हैं।



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