भारतीय जैन संघटना और आईआईएफएल समस्ता फाइनेंस की पहल से सिरोही बनेगा जल-समृद्ध

भारतीय जैन संघटना और आईआईएफएल समस्ता फाइनेंस की पहल से सिरोही बनेगा जल-समृद्ध


ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में भारतीय जैन संघटना (BIS) एवं आईआईएफएल समस्ता फाइनेंस के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण पहल का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत सिरोही जिले के सिन्दरथ ग्राम स्थित खेतलाजी के बड़े तालाब को पुनर्जीवन हेतु चयनित किया गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लुम्बाराम चौधरी, माननीय सांसद (सिरोही-जालोर) रहे।


कार्यक्रम की गरिमामयी उपस्थिति में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा भारतीय जैन संघटना के राजस्थान राज्य स्तरीय एवं सिरोही जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। माननीय सांसद लुम्बाराम चौधरी ने भारतीय जैन संघटना (BIS) द्वारा किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए अखिल जैन समाज एवं उनके द्वारा की जा रही समाजसेवा एवं विकासात्मक गतिविधियों की प्रशंसा की।
भारतीय जैन संघटना द्वारा देशभर में पिछले कई वर्षों से जल संरक्षण एवं जलस्रोतों के पुनर्जीवन के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अनेक राज्यों में सैकड़ों जलाशयों का सफलतापूर्वक कायाकल्प किया जा चुका है।


 इस अभियान की प्रेरणा भारतीय जैन संघटना के संस्थापक शांतिलाल जी मुथा की दूरदर्शी सोच है, जिसमें प्रत्येक गांव को जल समृद्ध बनाकर राष्ट्र को जल पर्याप्त बनाने का संकल्प निहित है। इसी विजन को साकार करने हेतु भारतीय जैन संघटना समुदाय, प्रशासन एवं निजी क्षेत्र के सहयोग से जल आत्मनिर्भरता की दिशा में सतत प्रयास कर रही है।

कार्यक्रम में राज गोलेचा, राजस्थान राज्य के पूर्व अध्यक्ष, विजय जैन, सिरोही जिले के अध्यक्ष, आशुतोष पाटणी, सिरोही जिला जल प्रमुख सहित बीजेएस जिला नेटवर्क के सदस्य शिरीष हरण, नरेंद्र पारिख, जय विक्रम हरण, संजीव हरण, आशीष कोठारी तथा आबू रोड से भारतीय जैन संघटना (BIS) के प्रतिनिधि अंकित शाह उपस्थित रहे। वहीं बीजेएस मुख्यालय से अशोक पवार एवं डॉ. कनू बलदानिया की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में ग्राम के सरपंच शिवराज सिंह ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए आशुतोष पाटणी ने कहा कि हमारी संस्कृति में तालाब और जल को पूजनीय माना गया है तथा जनजीवन के लिए गांवों को जलदार बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जिले में तालाब पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।


कार्यक्रम सम्पन्न होने के पश्चात तालाब से गाद निकासी (डी-सिल्टिंग) कार्य का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं उपस्थित गणमान्य अतिथियों द्वारा मशीन पूजन कर तालाब पुनर्जीवन कार्यों की विधिवत शुरुआत की गई। गाद निकासी से तालाब की जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी तथा निकाली गई उपजाऊ मिट्टी का कृषि उपयोग भी सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही मौरपुर स्थित डेरा नदी तालाब पर भी विधिवत रूप से कार्य प्रारंभ किया गया।
इस पहल से वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ भूजल स्तर में सुधार, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा ग्रामीण आजीविका को सशक्त आधार प्राप्त होगा। आगामी चरणों में जिले के अन्य चयनित गांवों में भी इसी मॉडल के तहत तालाबों के कायाकल्प के कार्य किए जाएंगे। भारतीय जैन संघटना के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन, ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे सिरोही जिले में जल संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय पहल बताया।

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