माउंट आबू का नाम बदलकर 'आबूराज तीर्थ' करने की मांग, खुले में मांस-मदिरा पर रोक की पहल
सिरोही, 11 मार्च।
राजस्थान के धार्मिक और पर्यटन स्थल माउंट आबू का नाम बदलकर 'आबूराज तीर्थ' करने और वहां खुले में मांस-मदिरा के सेवन पर रोक लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। इस संबंध में ग्रामीण विकास व पंचायत राज राज्यमंत्री ओटाराम देवासी और पिंडवाड़ा-आबू विधायक समाराम गरासिया ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र सौंपा है।
धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है माउंट आबू
राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने पत्र में बताया कि माउंट आबू प्राचीन काल से सनातन धर्म की आस्था का केंद्र रहा है। यहां कई ऋषि-मुनियों ने तपस्या की और अनेक ऐतिहासिक गुरु शिखर, देलवाड़ा जैन मंदिर, अचलगढ़, अदर देवी और विश्व प्रसिद्ध ब्रह्माकुमारी संस्थान जैसे धार्मिक स्थल स्थापित किए। हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन के लिए आते हैं।
खुले में मांस-मदिरा से श्रद्धालुओं को ठेस
विधायक समाराम गरासिया ने कहा कि धार्मिक स्थल होने के बावजूद, माउंट आबू में खुले में मांस की बिक्री और शराब के सेवन से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। इसलिए, इस क्षेत्र को 'आबूराज तीर्थ' घोषित कर, खुले में मांस-मदिरा के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
पहले 'आबूराज तीर्थ' के नाम से जाना जाता था क्षेत्र
राज्यमंत्री देवासी ने कहा कि पूर्व में इस स्थान का नाम 'आबूराज तीर्थ' ही था, जिसे बाद में बदलकर 'माउंट आबू' कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यहां 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है और इसे पुनः इसका प्राचीन नाम लौटाना चाहिए।
स्थानीय जनता की मांग को मिली ताकत
भाजपा जिला प्रवक्ता रोहित खत्री ने बताया कि माउंट आबू के लोग वर्षों से इसका नाम 'आबूराज तीर्थ' करने की मांग कर रहे थे। अब सरकार के सामने यह मांग रखी गई है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में माउंट आबू का नाम 'आबू तीर्थ' रखा जाएगा और धार्मिक वातावरण को बनाए रखने के लिए मांस-मदिरा पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा।
आगे क्या?
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं। यदि सरकार इस पर सहमति जताती है, तो माउंट आबू को 'आबूराज तीर्थ' घोषित कर, इसे एक शुद्ध धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।