भारत में हाई-स्पीड ट्रांसपोर्टेशन का नया युग: हाइपरलूप टेक्नोलॉजी की ओर बड़ा कदम
नई दिल्ली: भारत में परिवहन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज देश के पहले हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक का निरीक्षण किया, जो आधुनिक तकनीक और हाई-स्पीड ट्रांसपोर्टेशन के क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षी योजनाओं की झलक पेश करता है।
क्या है हाइपरलूप तकनीक?
हाइपरलूप एक उन्नत परिवहन प्रणाली है जिसमें कम दबाव वाली ट्यूब के अंदर मैग्नेटिक लेविटेशन (Maglev) तकनीक का उपयोग करके कैप्सूलनुमा ट्रेनें 1,000 किमी/घंटे की अविश्वसनीय गति से दौड़ सकती हैं। इस तकनीक के ज़रिए दिल्ली से मुंबई जैसी लंबी दूरी महज 60-90 मिनट में तय की जा सकेगी।
भारत का पहला हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक
➡️ भारतीय रेलवे और आईआईटी मद्रास की ‘अविष्कार हाइपरलूप’ टीम के सहयोग से देश का पहला हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक विकसित किया गया है।
➡️ यह ट्रैक 422 मीटर लंबा है और इस पर अत्याधुनिक तकनीकों का परीक्षण किया जा रहा है।
➡️ रेल मंत्री ने निरीक्षण के दौरान बताया कि सरकार इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर लाने के लिए नीति आयोग और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर विस्तृत योजना बना रही है।
भविष्य की बड़ी योजना
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में हाइपरलूप नेटवर्क का निर्माण करके देश में हाई-स्पीड ट्रांसपोर्टेशन की नई क्रांति लाई जाए। यह परियोजना सफल होने पर भारत दुनिया का सबसे लंबा हाइपरलूप ट्रैक बनाने वाला देश बन सकता है।
हाइपरलूप से भारत को क्या फायदे होंगे?
✔️ तेज़ और कुशल परिवहन – 1,000 किमी/घंटे की स्पीड से सफर मिनटों में तय होगा।
✔️ कम ऊर्जा खपत – पारंपरिक ट्रेनों और विमानों की तुलना में यह अधिक ऊर्जा-कुशल होगा।
✔️ पर्यावरण के अनुकूल – यह प्रणाली कार्बन उत्सर्जन को कम करके हरित परिवहन को बढ़ावा देगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार, अगले कुछ वर्षों में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने की दिशा में काम किया जाएगा। हाइपरलूप का सपना अब हकीकत बनने के करीब है, जिससे भारत की परिवहन व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।