क्या उद्यमियों ने बनाया सुपरपावर अमेरिक?

क्या उद्यमियों ने बनाया सुपरपावर अमेरिका?



अमेरिका को विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक और रणनीतिक महाशक्ति बनाने में किन लोगों की सबसे बड़ी भूमिका रही? इस सवाल का दिलचस्प जवाब देती है The Men Who Built America, जिसमें दिखाया गया है कि 19वीं सदी के पाँच साहसी और दूरदर्शी उद्योगपतियों ने आधुनिक अमेरिका की मजबूत नींव रखी।
इन दिग्गजों में शामिल थे—
Cornelius Vanderbilt (इन्फ्रास्ट्रक्चर और रेल)
Andrew Carnegie (स्टील उद्योग)
John D. Rockefeller (तेल उद्योग)
J. P. Morgan (बैंकिंग और वित्त)
Henry Ford (ऑटोमोबाइल)

इन उद्योगपतियों ने न केवल अपने-अपने क्षेत्रों में क्रांति लाई, बल्कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था को वैश्विक नेतृत्व तक पहुंचाया। इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्टील, तेल, बैंकिंग और ऑटोमोबाइल जैसे मूलभूत क्षेत्रों में उनकी दूरदर्शिता ने देश को औद्योगिक शक्ति बना दिया।

परोपकार की परंपरा की शुरुआत

इन उद्यमियों की सोच केवल निजी संपत्ति तक सीमित नहीं थी। उन्होंने “फिलांथ्रॉपी” यानी परोपकार की सशक्त परंपरा स्थापित की। विश्वविद्यालय, अस्पताल, लाइब्रेरी और रिसर्च संस्थानों को उदार दान देकर उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान और नवाचार का मजबूत आधार तैयार किया। आज अमेरिका का वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी सिस्टम और रिसर्च इकोसिस्टम उसी विरासत का परिणाम माना जाता है।

प्रोफेशनल मैनेजमेंट की मिसाल

इन उद्योगपतियों ने अपने व्यवसाय को केवल पारिवारिक संपत्ति नहीं, बल्कि “देश की अमानत” समझा। समय के साथ कंपनियां प्रोफेशनल मैनेजमेंट को सौंपी गईं, जिससे संस्थाएं स्थायी और प्रतिस्पर्धी बनी रहीं। यही कारण है कि अमेरिकी पूंजीवाद आज भी जीवंत और प्रभावशाली है।
भारत के लिए क्या संदेश?

भारत भी संसाधनों, प्रतिभा और उद्यमिता की परंपरा से समृद्ध देश है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्यमियों को सरल प्रक्रियाएं, सेल्फ-सर्टिफिकेशन, पारदर्शी नीतियां और सामाजिक सम्मान मिले, तो वे बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार और नवाचार को गति दे सकते हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि देश के विकास की रफ्तार तब तेज होगी जब सरकार सहयोगी की भूमिका निभाए और समाज उद्यमियों को राष्ट्रनिर्माता के रूप में देखे।


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